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वेब सेमिनार :- Anxiety Disorder यानी चिंता विकार, इसके प्रकार, लक्षण, दुष्प्रभाव, रोकथाम एवं उपचार ।

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इस वेब सेमिनार के जरिये आप हिंदी में चिंता एवं फिक्र के अंतर को समझकर, इसकी पहचान, प्रकार, लक्षण, दुष्प्रभाव, रोकथाम एवं इसके उपचार में आने वाली विभिन्न विधियों को जान पायेंगे। Hindi Webinar on Anxiety & Stress.

ध्यान देने वाली बात ये है कि इसके द्वारा एक इंसान की कार्यक्षमता यानी उसका काम धंधा, बिज़नेस में बहुत ज्यादा गिरावट देखी गयी है, अतः इस विकार को इस वीडियो से ध्यानपूर्वक समझे 1।

आपके आसपास इस प्रकार के विकार से अगर कोई पीड़ित हो (Anxiety or Stress) तो उसे हमारी इसी वेबसाइट के जरिये ऑनलाइन अपॉइंटमेंट करवाकर, जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ प्रदान करवायें ।

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डिप्रेशन (Depression) या अवसाद, आओ बात करें, क्या है, पहचान के लक्षण, कारण एवं उपचार। #Depression, #symptoms

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डिप्रेशन (Depression) या अवसाद, सिर्फ मन की एक स्थिति ही नहीं , एक जानलेवा बीमारी भी हो सकती है।

World Health Organization ( WHO )  द्वारा स्वास्थ्य की परिभाषा के अनुसार:  

“स्वास्थ्य वह अवस्था है,  जिसमे व्यक्ति अपने आपको शारीरिक, मानसिक, सामाजिक ओर आध्यात्मिक रूप से सुखी महसूस करता है । इस तरह न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वस्थता भी स्वास्थ्य के बहुत उपयोगी है।“

डिप्रेशन (Depression) पे हमारी शार्ट वीडियो के माध्यम से इसके पहचान की सम्पूर्ण जानकारी पाएँ।।

डिप्रेशन (depression अवसाद ) मानसिक बीमारियों मै से एक है जो सिर्फ मानसिक कमजोरी , सुस्ती ,व्यक्तिगत असफलता या इच्छा शक्ति की कमी का परिणाम नहीं है।

            डिप्रेशन देवी –देवताओ के प्रकोप , भूत –प्रेत ,जादू –टोना आदि के परिणाम स्वरूप नहीं होता। अन्य शारीरिक बीमारियों की तरह ही डिप्रेशन के भी मानसिक एवं शारीरिक लक्षण पाये जा सकते है। डिप्रेशन का प्रभावी इलाज अवश्य हो सकता है ओर सुखद जीवन जी सकते है ।

डिप्रेशन  (अवसाद Depression ) किसे कहते है ? आओ बात करें !!

सामान्य तौर पर डिप्रेशन (अवसाद ) को निम्न संदर्भ मै प्रयोग किया जाता है :

  • लंबे समये तक लगातार और नकारात्मक सोच या दु :खी  मनोदशा ,जो किसी के भी जीवन को कई तरह से प्रभावित करती है या
  • जिन गतिविधियों मे व्यक्ति रुचि और खुशी पाता था उनमें दिलचस्पी न रहना ।

प्रत्येक व्यक्ति समय –समय पर डिप्रेशन और उदासी का अनुभव करता है। कई लोग एक बार या ज्यादा लेकिन अपने आपमे छोटी और सीमित अवधि के लिए डिप्रेशन का अनुभव तो करते ही है । जब इस तरह की संवेदनशीलता या भावुकता अधिक समय तक रहती है ,व्यापक होती है और बार –बार सामने आती है तब व्यक्ति  डिप्रेशन से प्रभावित हो सकता है ।

डिप्रेशन depression मानसिक कमजोरी या चारित्रिक दोष की निशानी नहीं है। डिप्रेशन सुस्ती ,कमजोरी व्यक्तिगत असफलता या इच्छा शक्ति की कमी का परिणाम नहीं है। हालांकि डिप्रेशन शब्द के कई अर्थ होते है, मनोचिकित्सा के संदर्भ मै रोगी द्वारा उनकी भावात्मक पीड़ा की अनुभूति का वर्णन किया जाता है और इस अर्थ मै यह एक लक्षण – समूह है ।

depression-ntडिप्रेशन depression के मुख्य लक्षण क्या हैं ?    

डिप्रेशन आम तौर पर पाई जानी वाली चिकित्सीय बीमारी (medical illness) है जो बहुत ही विशिष्ट लक्षण रखती हैं । डिप्रेशन मै कुछ निम्न लक्षण होते हैं । प्रत्येक व्यक्ति मै एक जैसे ही लक्षण नहीं होते है । डिप्रेशन के लक्षण किसी भी अन्य बीमारियों की तरह व्यक्तिगत रूपसे भिन्न हो सकते हैं ।

1 . मानसिक लक्षण :

  भावनात्मक और व्यावहारिक लक्षण:

  • लगातार उदासी या खालीपन (दो सप्ताह से अधिक के लिए ) । यह एक मुख्य प्रकट और विशिष्ट लक्षण हैं ।
  • असंगत ग्लानि महसूस करना ।
  • मिजाज का आगा –पीछा होना ।
  • आसान बात भी भूल जाना ।
  • कमजोर एकाग्रता , अन्यमनस्कता , अनिश्चितता ।
  • उन गतिविधियों मैं रुचि न लेना जिनमे पहले थी ।
  • अकेलापन महसूस करना, भावशून्यता, अन्य व्यक्तियों और नई परिस्थितियों से अपने आप अलग करना ।
  • चिंता, घबराहट, तुच्छ बातों पर चिड़चिड़ाना ।
  • अपने लक्ष्यों के प्रति निरुत्साहित होना ।
  • स्वयं के शरीरिक बाह्य दिखाव मे रुचि खो देना ।
  • नशे या शराब की ओर झुकाव ।

  विचार /अनुभूति जो स्वयं की असफलता के लिए हो सकते हैं :

  • असफलता संबंधी विचार ।
  • आत्माभिमान की कमी । लगातार अपने आपको कोसना ।
  • शीघ्र निराश होना।
  • असहयोग ,निराशा और निकम्मापन के विचार ।
  • दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओ के लिए स्वयं को जिम्मेदार ठहरना ।
  • भविष्य के लिए नकारात्मक और निराशावादी अपनाना ।
  • यदि डिप्रेशन बहुत तीव्र है तो इसके साथ मतिविभ्र्म और मिथ्याविचार भी जुड़े होते है । सामान्यत: ये डिप्रेश्ड (अवसादित) मनोदशा के साथ होते हैं और अपराध ,व्यक्तिगत अपर्यापता या रोग के विचारों पर केन्द्रित हो सकते हैं ।

2. शारीरिक लक्षण :-

  • सामान्य नींद की प्रक्रिया मे विघ्न पैदा होना (अधिकतर नींद का न आना, नींद का बार बार खुल जाना या प्रात: नींद उठ जाना और सामान्य नींद से अधिक सोना ) ।
  • मंदगति होना – जैसे बोलने ,घूमने आदि मे मंद होना। परिवार के सदस्य या घनिष्ठ मित्र इस परिवर्तन को पहचानते हैं। हालांकि दूसरी ओर कुछ लोगों मे विपरीत लक्षण दिखाई देते हैं जैसे बैचेनी और अशांति ।
  • भूख मे कमी और लगातार वजन कम होना या अधिक भोजन करना (चैन पाने के लिए भोजन ) परिणाम स्वरूप वजन का बढ़ना ।
  • थकावट महसूस करना या शीघ्र थकान आना ।
  • अजीर्ण (अपच) ,मुंह का सुखना ,मतली आना ,कब्ज और अतिसार ।
  • मासिक धर्मचक्र मे अनियमितता ।
  • यौवन क्रियाओं में कम भाग लेना ।
  • लगातार सरदर्द , पेटदर्द, कमरदर्द , छाती-दर्द , पैरो और जोड़ो मे दर्द , भारीपन और पैरो मे पसीना आना ,श्वास लेने मैं कठिनाई आदि ।

डिप्रेशन के ये लक्षण कम से कम दो सप्ताह की अवधि के होने चाहिए और व्यक्ति को तकलीफ देह या सामाजिक जीवन या दैनिक कामकाज मे परेशानी करने वाले होने चाहिए । जिसके आधार पर डॉक्टर के द्वारा इस बीमारी का मुख्य निदान किया जा सकता है।

अधिक जानकारी के लिए आप ऊपर दी गयी Video देख सकते हो जिसमें हमने डिप्रेशन के लक्षणों की पहचान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है।

संदेश :-

            Article पढ़ने के लिए आप सभी का बहुत – बहुत आभार। इस जानकारी को खुद समझें एवं इसे share कर औरों को बताएं या समझाएँ। आपके आसपास इस प्रकार के विकार से अगर कोई पीड़ित हो (Depression) तो उसे हमारी इसी वेबसाइट के जरिये ऑनलाइन अपॉइंटमेंट करवाकर, जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ प्रदान करवायें ।

अगर आप चिंता विकार से परेशान है तो यहाँ क्लिक कर वेबिनार जॉइन करें । 

depression

Thank You !!

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ध्यान या मेडिटेशन को जानें।। बुद्ध या स्वामी विवेकानन्द की तरह।। Learn Basic Meditation.

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क्या आप बुद्ध या स्वामी विवेकानन्द की तरह Meditation करने या सीखने के लिए इच्छुक हो ?

अगर हाँ तो ये पोस्ट आपके लिए है। विवेकानंद जी ने कहा था कि “किसी बात से डरो मत। तुम अद्भुत कार्य करोगे। जिस क्षण तुम डर जाओगे, उसी क्षण तुम बिल्‍कुल शक्‍तिहीन हो जाओगे”। “कभी मत सोचिए कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है, ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है। अगर कोई पाप है, तो वो यह कहना है कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं”।

जिंदगी की परेशानियों से नहीं डरना, हमेशा सबल रहना ही आसान भाषा में उत्तम मानसिक स्वास्थ्य है।

🙏अब बात इस पोस्ट की !!🙏 मेरे देश के युवाओ !! आप ही इस देश का कल हो, इस देश का भाग्य हो, यकीनन सौभाग्य हो।

आप विवेकानन्द या बौद्ध की फ़ोटो देखते होंगे, तो आपको इनमें ज्यादातर ध्यान या Meditation का Posture दिखता होगा।

जैसे ऊपर दी गयी फोटो में है, साथियों ये क्या है ?? थोड़ा explain करता हूँ।
ये ध्यान या Meditation की State है जिसे State of Mindfulness भी कहा जाता है।
ध्यान आपके Mind को निर्मल करता है, पॉजिटिव emotions लाता है, आपकी efficiency बढ़ाता है, विचारों में पॉजिटिविटी के साथ ज्यादा clearity लाता है, आपके लक्ष्यों को हासिल करने का धैर्य आने लगता है, दुनिया को देखने का नजरिया बदलने लगता है, आप सत्य के ज्यादा पास पहुंचने लगते हो, यानि आप उन विचारधारोंओं को छोडने लग जाते हो जो वास्तव में अपनी जिंदगी में महत्व नहीं रखती

अतः इसके लिए The Youth Needs The Real Truth !! कहना ज्यादा सही होगा।।
Social media के दौर में सच्चाई तक पहुँचने का कष्ट करें, आपके मोबाइल, TV, यूट्यूब पे आने वाली हर एक सूचना को सही मानने से पहले अपनी तार्किक शक्ति का इस्तेमाल करें।।

धैर्य की बात करें, तो युवाओं के लिए ये बहुत जरूरी है, आपकी यही वो उम्र है जिसमें आप वो सभी स्किल सीख सकते हो जो आपके एवं आपके परिवार के ज़िंदगी भर काम आएगी, स्किल सीखने में सबसे बड़ा योगदान आपका ध्यान है, आज social media आपके ध्यान यानि फोकस का सबसे बड़ा शत्रु है। इसी लिए अगर आप मेडिटेशन करते हो तो आप अपने माइंड को कंट्रोल करोगे ना कि आपके social मीडिया कि नोटिफ़िकेशन। तभी विवेकानंद जी की इस बात पे आप चल पाओगे कि “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए”।

तो आइए इस विडियो से जानते है, मेडिटेशन के फायदे , इसका बेसिक सिद्धांत एवं इसको करने की आसान विधि ।।

बोधिज़्म में ध्यान की विप्श्यना विधि के द्वारा मानसिक स्वास्थ्य को उतम करके, तार्किक सोच को बढ़ावा दिया जाता है, जो उस इंसान एवं उसके परिवार को अंधविश्वास के चक्करों से दूर कर, प्रगति के मार्ग में तीव्र गति से चलने को मजबूर कर देती है। आप ध्यान की विप्श्यना विधि के बारे में यहाँ क्लिक कर जान सकते हो। ये इतनी प्र्भावी है कि विप्श्यना करवाने वाले सेंटर किसी से फीस नहीं लेते, इससे होने वाले फ़ायदों को देखकर लोग उन्हे खुल के donate करते है।

खैर मुद्दे पे आयें तो ये मेरी पोस्ट यूथ के नाम है, आप स्वतंत्र भारत के नागरिक हो, अपने Mind को भी आजाद करो, सिर्फ आपका Mind (Power of Your Mind) ही है जो आपके लिए असीमित सम्भावनाये, अवसर की खोज कर सकता है।। इसका ध्यान रखिये।।
Be Mindful….. Be Meditate. जय भारत, जय संविधान।।

#Mindbook.😊 THANK-YOU !!

 

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इन विडियो ये जानो, सभी बच्चे दिमागी कमजोर नहीं होते – बहुत सारे मानसिक बीमारी से ग्रसित हो सकते है।

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आइये इन विडियो ये जानो, सभी बच्चे दिमागी कमजोर नहीं होते – बहुत सारे किसी मानसिक बीमारी (Specific Learning Disorder) से ग्रसित हो सकते है। जिनका बहुत हद तक इलाज संभव है, ये बीमारियाँ लगभग “Specific learning Disability” के अंतर्गत आती है।
ये उन बच्चो की कहानी है जिन्हें अक्सर दुनिया हाशिये पर छोड़ देती है। ये बच्चे सामान्य या सामान्य से भी ज्यादा बुद्धि लिए होते है, बस इनका दिमाग से काम लेने का तरीका अलग होता है। इनके लिए यही कहेंगे ;
“खो न जाइए। तारे जमीं पे”

1. इन बीमारियों का परिचय (Specific Learning Disorder in English).

2. हिन्दी डॉक्युमेंट्री (Specific Learning Disorder)

3. इनके कुछ लक्षण इस विडियो में (English).

4. Learning disabilities (Hindi).

5. जानिए इस दुनिया के कुछ फेमस लोगों के बारे में जो इन बीमारियों के शिकार थे (English).

पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद !!

हमसे परामर्श की एप्पोइंटमेंट के लिए यहाँ क्लिक करें ।।

अच्छी लगी तो शेयर करें ।।

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जानिये नशा आखिर काम कैसे करता है ?

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आप सभी addiction यानि नशे के बारे में काफी कुछ जानते होंगे लेकिन फिर भी सीमित शब्दों में कुछ ऐसी बातें लिखना चाहता हूँ, जो आज के youth के लिए बहुत जरूरी है।

Addiction या नशा दिमाग का दीमक है। चाहे छोटा हो या बड़ा ( निकोटिन यानी गुटखा, बीड़ी, सिग्रेट से लेके शराब, स्मैक, अफीम,हेरोइन, डोडा, भांग, कोकैन या MDMA, LSD आदि ) । ब्रेन पे इनका प्रभाव जिस प्रक्रिया से होता है वो यधपि एक जैसा नहीं है – स्मैक अलग method से कार्य करती है, शराब अलग तरीके से कार्य करती है ( Neurotransmitter level ) । लेकिन एक normal इंसान की जिंदगी को ये कैसे प्रभावित करते है ? इसे समझना बहुत आवश्यक है, ये प्रक्रिया जिसे मेडिकल Science “Reward System” कहती है ये हमारी जिंदगी का राज भी है।

ये राज कैसे हुआ ?? ये यूँ कि ये वो राज है जिसे अगर समझ जाये तो आपको पता चलेगा कि नशा हमें जो feeling दे सकता है, उससे कहीं ज्यादा आनंद हम ब्रेन के Reward system की Theory को समझके, उसे अपने जीवन में अमल करके ले सकते है। इसके लिए आप हमारी इस विडियो को देख सकते हो।

आप नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति से ढंग से बात करके देखो, वो कुछ इस तरह कह सकते है कि साहब हमें ये क्या हो गया था कि Middle class family से होने के बावजूद भी हमने पिछले 10 सालों में लगभग 25 लाख शराब पे उड़ा दिए। इन पैसो का बहुत कुछ हो सकता था। माँ के इलाज में, बहनों की शादी में, घर बनाने में एवं ओर भी बहुत कुछ । अब खुद परेशान हूँ, मुझे Guilt होती है, मैं आजाद नहीं हूँ, मैं नशे का गुलाम हूँ और इससे बाहर निकलने की जंग में लगभग अकेला हूँ।।

इसे समझना ही राज है …आओ थोडा दिमाग लगाते है…..

human-1177413_1280          दोस्तों जितना बड़ा संसार आप बाहर देख रहे हो, उससे हीं ज्यादा बड़ा संसार आपके दिमाग (brain) में है। किसी कंप्यूटर के प्रोसेसर की तरह आपका ब्रेन हर वक्त कार्य करता है। आपके सोच – विचार , भावनायें और व्यवहार इसी पे निर्भर है। इसे थोड़ा विस्तार से समझे तो बुद्धि एवं मन (mind) में विभाजित किया जा सकता है। ये दोनों ( बुद्धि & मन ) एक दूसरे के पूरक है।

हमारा मन जिसे मेडिकल साइंस में Limbic system से समझाया जाता है। उसमें एक सेंटर होता है जिसे न्यूक्लियस accumbens कहते है। ये हमारी ख़ुशी, आनंद का आधार होता है। जब एक पिता अपने बच्चों के लिए 1 kg फल लेके आता है तो उसे जो ख़ुशी, जो feeling मिलती है वो यही Centre करवाता है। ये तो सिर्फ एक उदाहरण है ऐसे हजारो कार्य है जो हम सिर्फ इसलिए करते है कि ये सेंटर Activate हो और हमें आनंद की अनुभूति हो।

जैसे खाना, खेलना, मूवी देखना, डांस करना, दोस्त के साथ बातें करना यानी आपको जिस कार्य को करने के दौरान ख़ुशी या euphoria जैसा अहसास हो, समझ जाओ ये सेंटर आपके ब्रेन में Dopamine नामक रसायन ( Neurotransmitter ) से आपकी जिंदगी को खुशनुमा बना रहा है।।brain-954821_1280

अब बात करते है ये नशे कैसे कार्य करते है ??

ये नशे Direct हिट करते है इस सेंटर – “Nucleus Accumbens” को। प्रकृति ने खुशियों के लिए दिमाग में जो सर्किट बनाये। नशा इन्हें बाईपास करता है एवं बिना किसी वजह के Directly अपना प्रभाव दिखाके, इसे एक्टिवेट करता है। आसान भाषा में- गाँव में जब गाय या भैंस oxytocin हॉरमोन की कमी से दूध देना बंद कर देती है तो किसान Directly oxytocin हॉरमोन का injection लगाके दूध निकाल लेता है। यहाँ पे भी ठीक इसी तरह नशा इस center को डाइरैक्ट हिट कर dopamine release करवा, इंसान को आनंद, खुशी या रिवार्ड का अहसास करवाता है – यही Reward System का Bypass है।

यानी जो ख़ुशी किसी इंसान को घर में 2 kg सब्जी लाने से होती थी। आज वही या उससे ज्यादा ख़ुशी उसे एक शराब की बोटल लाने से होने लग गयी ओर सब्जी लाना एक बेवकूफी का सा काम लगने लगा।

उसके दिमाग के वो सारे सर्किट नैचुरल खुशी से संबन्धित थे, धीरे – धीरे नकारा होते जायेंगे और एक टाइम ऐसा आ जाता है कि घर, परिवार, बीवी, बच्चे, रिश्तेदार सब उसके लिए पराये से हो जाते है – प्यार रहता है तो एकमात्र नशे से, उसकी जिंदगी का एकमात्र यही सहारा रह जाता है। इसे मेडिकल Science – Drug Addiction कहती है एवं इसे एक बीमारी के तौर पे ठीक किया जाता है।

हाँ उसे अपनी इस स्थिति का अहसास होता है। उसे ये पता रहता है कि मैं जिस रस्ते पे चल रहा हूँ वो गलत है, मैं जो व्यवहार कर रहा हूँ वो गलत है। लेकिन ये उसकी मजबूरी हो जाती है जैसे किसी TB के मरीज को खाँसना एक मजबूरी है, ठीक वैसे ही।।

यहाँ पे एक सवाल – क्या इसे TB की तरह एक बीमारी माना जाना चाहिए ?   आप सोचिएगा !!

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आखिर एक संदेश :-

दोस्तो नशे पे अगर गहन स्तर पे सोचा जाए तो इसकी जड़ Reward System से जुड़ी है, एक इंसान अपने दोस्तों के साथ बिना किसी नशे के अपनी लाइफ enjoy करता है, वहीं दूसरी ओर एक को enjoy के लिए शराब का सहारा लेना पड़ता है, अगर ये सहारा ना हो तो कुछ कमी लगती है।

अतः आज आने वाली पीढ़ी को, खासकर कॉलेज, स्कूल्स के स्टूडेंट्स को एक special ट्रेनिंग की आवश्यकता है जो उन्हे बिना नशे के अपनी लाइफ की खुशियों को celebrate करना सीखाये।

इसके लिए सर्वप्रथम Parents को आगे आना चाहिए और स्कूल एवं कॉलेज स्तर पे ऐसे प्रोग्राम शुरू करवाने चाहिए।।

Dowload pdf file of Intro of Addiction

धन्यवाद।।

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VIDEOS REVIEW: How to read fast ?

Reading Time: 2 minutesHello, In this post we are Embed few videos  which is actually give you ideas about our faulty habits of reading slow & how we overcome it.

These videos give you tips for reading fast & get maximum output from whole context.

  • It’s a common thing that only reading of a book can give you a significant information that can be used for built a high level concept on important topic of subject so it can help in exams or in your general knowledge.
  • More wisdom you gain ,more you will become successful.  By gaining so much knowledge from books in a short amount of time.
  • So there are the techniques to improve your reading skill is ……..

  1. Think about digging this gold.
  2. Every book has two three golden nugget sound which book is based.
  3. Don’t think that you have to read from start to finish.
  4. First go through the index.
  5. Read the front and the back covers, get an idea of what the book is about.
  6. think about what you already agree with, and what you don’t agree with.
  7. Pay attention to those parts that you didn’t know about and what you didn’t agree with.
  8. Use bolded parts, and summaries at the end of the book.
  9. You can also watch these book summaries before reading the book, so that you know what to look for.
  10. You can find many audiobooks Online. Listen to them at 2 times the speed.

……… Now here one more ;

& This is also having some complex but important concept on it…..

& Here is a psychology part on this issue….

So What’s your plan.

  • How fast you can read can determine a lot of things in your life.
  • Bill Gates and Warren Buffett both have said that there is superpower would be reading faster.
  • These may be of self help books or our text books.
  • Lot of people want to know “The Secret of fast reading” specially students.

So if you thought that this post worth sharing with others. Do it now.

Thanks a lot.

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ROLE OF PSYCHOLOGY FOR HUMAN MIND.

Reading Time: 2 minutesMindbook के name से आप सभी को एक बात तो समझ में आ गयी होगी कि हम यहाँ Mind यानि “मन” के बारे में बात करेंगे। लेकिन यह जानना भी काफी important है कि इन सभी के लिए हमारा source of information क्या है ?

हम इस वेबसाइट पे जितने भी issue कवर करेंगे उनमें से काफी में Psychology का योगदान रहेगा। अतः एक छोटा सा introduction तो बनता ही है ।

By Simplest Definition “Psychology” is “Study of human behavior & their mental process”.

हम इस संसार में जो कुछ भी करते है, चाहे वो व्यवहार हो या हमारा experience, उन सब की वजह brain से निकलकर आती है। Brain में कुछ process चलते है, भले ही वो thinking से related हो या memory से या ऒर कुछ लेकिन कहा जाता है कि brain में कोई molecule जिस अंदाज में twist करता है, उस इंसान का behaviour भी उसी के अनुरूप होता है।

Brain एक बहुत बड़ी term है ये उसी प्रकार से समझा जा सकता है जैसे कोई कंप्यूटर Hardware & Software, दोनों को मिलाकर Complete होता है। Brain के Hardware के पार्ट को सामान्यतया “Neurology” cover करती है।

& Software यानि हमारी feelings, mood state or emotions, thinking, perception, memory, judgement, motivation, decision making etc इन सबको किसी Computer के Operating System की software की तरह physical form में तो नहीं देखा जा सकता लेकिन हमारी जिंदगी के हर एक experience के पीछे इसी Operating System का योगदान है।

इस सिस्टम को Psychiatry & Psychology से समझा जा सकता है। दोनों name इसलिए लिखा है क्योंकि Psychiatry, Neurotransmitter के level पे work करती है। हर एक Experience का Molecular basis खोजने की कोशिश करती है।

जबकि Psychology, Behaviour पर ज्यादा focused रहती है, लेकिन जरूरत के अनुसार ये भी mental process से correlate करती रहती है।

तो कुल मिलाकर बात यही है कि आप जिसे Mind कहते हो, इनके बारे में लगभग “राज” Science की ये दो branch (Psychiatry & Psychology) हमारे सामने रखने में सक्षम है। अधिक जानकारी के लिए आप ये Video भी देख सकते हो।

So What is Psychology ?

  • Human Mind के experiences लिए Psychology एक broad range रखती है।
  • ये Cover करती है – Learning and Memory ; Sensation and perception ;
  • Motivation and emotion ; Thinking and language ;
  • Personality and social behavior ; Intelligence ;
  • Child development & ओर भी बहुत कुछ।

Psychology हमारे सोचने- समझने के pattern की study करती है, जिसका उपयोग हमारी विभिन प्रकार की problems को समझने & उन्हें solve करने में किया जाता है।

अतः Mind को समझने के लिए & इसी लाइफ को Great Life बनाने के लिए हमें बहुत कुछ जानना पड़ेगा, साइकोलॉजी उन्हीं में से एक है।

धन्यवाद।।

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IMPROVE OUR MEMORY BY USING THESE PSYCHOLOGY CONCEPTS.

Reading Time: 3 minutesMemory हमारे जीवन मे बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हम जो कुछ भी नया सीखते है वो Memory में ही स्टोर रहता है। सीखने की योग्यता हमारे जीवन के लिए जरूरी  है।

कई बार हम इस उलझन में पड़ जाते है कि जिस जानकार व्यक्ति से आप बात कर रहे थे उसका नाम आपको याद नहीं आ रहा है या  आप चिंतित और  helpless अनुभव कर रहे है या परीक्षा से एक दिन पहले आपने जो कुछ अच्छी तरह से याद किया वह परीक्षा के दौरान याद नहीं आ रहा था। इसके अलावा हमे बेहद शर्मिंदगी महसूस करनी पड़ती है जब हम कई छोटी बड़ी बातों या वस्तुओ  को भूल जाते है।

अत: अच्छी memory आपको कई सफलता पाने मे मदद कर सकती है। इसी बात को ध्यान मे रखकर हम आपके लिए Memory सुधारने के कुछ Points लेकर आए है। तो देखते है की आप अपनी Memory को कैसे सुधार सकते है।

  1. ENGAGE IN DEEP LEVEL PROCESSING – अगर आप किसी सूचना को याद करना चाहते है तो उसे deep level process करे। अगर सूचना के कम attention से देखने की बजाय उसके meaning पर ज्यादा ध्यान देकर, उसे पहले से याद information से जोड़ा जाए & ये देखा जाना चाहिए कि ये हमारे कैसे काम आ सकती है। इससे brain नयी सूचना को encoding कर long term memory में स्टोर करने लग जाता है। जिससे उसकी memory भी अच्छी बन जाती है। जितना संभव हो ऐसे प्रश्न पूछे जाए जो उसके अर्थ ओर संबंध से जुड़े हो। इस तरह नयी सूचना आपकी already stored सूचना का हिस्सा बन स्थायी हो जाती है।
  2. METHOD OF LOCI (स्थान विधि) – इस METHOD को use करने के लिए याद किए जाने वाले items को पहले visual image की form मे एक जगह पर arrange कीजिये। Serial order मे items को याद रखने मे यह method उपयोगी है। इसके लिए पहले उन objects के स्थानो की कल्पना कीजिये जिनके specific sources को आप अच्छे से जानते हो, फिर जिन वस्तुओ को आप याद रखना चाहते है। उन्हे एक-एक स्थान से संबंधित कर दीजिये।
  3. THE KEYWORD METHOD – मान लीजिये की आपको English आती है ओर आप किसी अन्य किसी LANGUAGE को सीखना चाहते है तो English का कोई word जिसका sound उस विदेशी या दूसरी भाषा से मिलता जुलता हो, उसकी पहचान कर लीजिये। उदा॰ के लिए अगर आपको Spanish का word pato याद करना है जिसका मतलब है duck(ब्त्तख), तो आप English(अँग्रेजी) का pot शब्द ले सकते है। फिर main word pot ओर याद किए जाने वाला word(शब्द) pato, दोनों का एक interaction करते हुए कल्पना कीजिये की एक पानी के बर्तन (pot) मे एक duck (pato, Spanish word) है। Foreign language को सीखने का यह method रटने से अधिक अच्छा है। ओर इससे आप किसी word को लंबे समय तक याद रख सकते है।
  4. FIRST LETTER TECHNIQUE/ MNEMONIC TECHNIQUE – इस method को use करने के लिए याद किए जाने वाले हर शब्द के पहले अक्षर को लेकर उससे एक शब्द या sentence बनाए। उदहारण के लिए rainbow इन्द्रधनुष के रंगो को VIBGYOR की तरह याद किया जाता है जिसमे v=violet(बैंगनी), i=indigo(जामुनी), B=blue(नीला), g=green(हरा), y=yellow(पीला), o=orange(नारंगी), r=red(लाल)

इनमें आप LINKING और VISUALIZATION का प्रयोग कर इनकी memory span को बढ़ाया जा सकता है।  याद किए जाने वाले शब्द को उस WORD के साथ LINK कीजिये जो आपके दिमाग मे पहले से ही स्टोर है।

  1. CHUNKING – इस method मे कई छोटी छोटी units को मिलाकर एक बड़ा chunk (खंड) बनाया जाता है। उदहारण के लिए agar आपको number की एक series याद करनी है जैसे-198320072011 तो आप 1983, 2007, 2011 के chunk बना सकते है तथा इसे भारत के world cup जीतने के years की form मे याद कर सकते है। एक ओर उदहारण लीजिये जैसे-194719502004 तो आप 1947, 1950, 2004 का chunk बना सकते है। इस chunk को आप इस form मे याद कर सकते है 1947- मे भारत आजाद हुआ, 1950 मे भारत का संविधान लागू हुआ, 2004 मे सुनामी आई थी।
  2. ETYMOLOGY TECHNIQUE – यह technique शब्दो के अध्यन, उनकी उत्पत्ति और उनका विकास पर आधारित है। इसमे आप ROOT words के बारे मे सीखेंगे। English language के कई शब्द root words से बने है। ये root word ज़्यादातर लेटिन ओर ग्रीक भाषा से ही निकले है। जैसे- motivation word लेटिन word movere, जिसका मतलब “to move” है से निकला है। Motivation is what “moves” people to do the things they do। इसी प्रकार EGOCENTRIC-SELF CENTERED ROOT WORD EGO- I/SELF से बना है। इस technique से आप words को लंबे समय तक याद रख सकते है।

अंत मे आपकी अपनी memory को सुधारने के लिए आपको कई factors की ओर ध्यान देना होगा जो आपकी memory को प्रभावित करते है। जैसे, आपकी Physical & Mental Health, आपकी रुचि,  Content of new learning इत्यादि।

 

Thanks a lot.

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भूतों से ज्यादातर लोग रात को ही क्यों डरते है ? Perceptual Disturbance in night time.

Reading Time: 3 minutesइंसानो की जिंदगी बहुत से उतार चढ़ाव से गुजरती है, कभी ख़ुशी तो कभी गम , इसी तरह कभी किसी को डराया जाता है तो कभी खुद को किसी से डरना पड़ता है।
अगर हम एक लिस्ट बनाये कि इंसान किस किस से डरता है तो उस लिस्ट में कहीं न कहीं भूतों का भी नंबर आ ही जाता है।
कोई भी इंसान भले वो बचपन में ही क्यों न डरा हो लेकिन डरा जरूर होगा।
लेकिन खास बात ये है कि भूत भी होस्टल के छात्रों की तरह रात को सैर सपाटा करते है, और मन करे तो किसी को भी डरा देते है।
तो आइए जानते है कि आखिर क्या वजह है कि लोग दिन में इनकी जरा भी परवाह नहीं करते लेकिन रात होते ही इनसे भय खाने लग जाते है ??

मुख्यतया ये खेल होता है हमारे : Thoughts+Perception का यानि हमारे आस पास के environment से हमारे senses के द्वारा हमारे ब्रेन को जो भी सिग्नल मिलता है उसे हमारा दिमाग किस रूप में लेता है, इससे ये (ब्रेन) क्या मतलब निकालता है।
हमारे frontal ब्रेन यानि आगे के हिस्से के ब्रेन को हम ज्यादातर सोचने के काम में लेते है। भूतों का खेल हमारी सोच से शुरू होता है।
भले ये सोच बाहर से आयी हो (किसी ने idea दिया हो) या कोई ऐसी घटना जो brain को समझ नहीं आयी & इसने इसे भूत मान के समझा।
बस यही से भूतों का शासन स्थापित हो गया।

यहाँ इंसान के पास thought पहुँच चुकी होती है लेकिन इसका use तब होता है जब हमारे Perception में थोड़ी सी भी abnormility हो चुकी होती है। भले वो Environment के कारणों से हुई हो।
जैसे 1.आप सुनसान रस्ते पर अंधेरे में जा रहे हो। आपका brain लगातार आपको आसपास के environment के बारे में सूचनाएं दे रहा होता है। तभी रस्ते में आगे एक छोटा सा पेड़ आने लगता है। आपका ब्रेन समझ नहीं पा रहा ये क्या है। तभी अचानक frontal cortex ने कहा, कही ये भूत तो नहीं, बस फिट हो गया, हवा की वजह से वो थोड़ा हिल भी रहा था। पसीनें आना शुरू हो गये, automatic thoughts आने लगी कि आज तक जिसके बारे में सुना था वो आज सामने आ गया।
अब यहाँ उसके पास 2 रस्ते है एक हिम्मत करे आगे जाये & देखे कि भूत दिखता कैसे है।
दूसरा धीरे से किनारा कर अपना रास्ता बदल लो।
ज्यादातर लोग 2nd चुनते है। जैसे तैसे जल्दी जल्दी घर पहुँचते है और फिर next day से प्रचार शुरू। क्योंकि जो मेमोरी हमारे emotions जैसे fear के साथ associate होती है वो बहुत strong होती है, उसे बंदा भूल नहीं पाता।

हा यही कहानी तब शुरू हो जाती है जब बंदा अँधेरे में रस्सी को सांप समझ लेता है।

तो इनकी वजह है Perception इस case में ब्रेन normal है लेकिन उसे पर्याप्त मात्रा में सिग्नल नहीं मिल रहे यानि Absence of Sensory Stimulation ; हमारे Sensory Organs जैसे कान, आँख पर्याप्त मात्रा में information नहीं दे पाते तो एक normal brain भी Abnormal Perception कर सकता है।
{जैसे किसी को बहुत दिनों तक अँधेरे कमरे में रख दो उसे Visual Hallucinations होने लग जाते है, ये क्या होते है आप ये वीडियो देख सकते हो )

& Normal brain से ये मतलब कि ऐसी बहुत सी बीमारियाँ होती है जिसमें Brain Normal नहीं होता ऐसे केस में मरीज को ऐसे लोग, जानवर या आकृति दिखने लग जाती है जो आसपास नहीं है।
ऐसी आवाजे आने लग जाती है जिनका दूर – दूर तक कोई स्त्रोत नहीं है।
अगर किसी को तेज बुखार हुआ हो तो भी ऐसा हो सकता है।
{आप ये सब न्यूरोलॉजी या साइकाइट्री वार्ड में जाकर मरीजो से बात कर इनके बारे में जान सकते हो}
इन्हें ही HALLUCINATION कहते है, याद रखना।।

लेकिन सोचने वाली बात है कि इस दुनिया में हजारों लाखो सालों से इंसान+जानवर पैदा हुए & मरे, उनका कर्मकांड किसी ने करवाया या नहीं करवाया कुछ पता नहीं,
अगर उनमें से 1% के भी भूत, अगर हमारे लिए समाज सेवा के कार्यो (जैसे कोई रिश्वत ले तो तुरंत उसके भूत चिपक जाये, कोई किसी पर जुल्म करे तो भूत उन्हें बचाने आये).
आदि करने लग जाते तो ये दुनिया बहुत रंगीन होती।।

खैर आपके लिए इतना कहना चाहेंगे कि भूतकाल में जो हो गया सिर्फ वही भूत है। ये जिंदगी हमारी खुद की है, इसे अच्छे से जीना आपकी अपनी जिम्मेदारी है। हर एक समस्या का समाधान है, आज नहीं तो कल।।

धन्यवाद।।
स्वस्थ रहो, मस्त रहो।।

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HOW WE LEARN WITH COGNITIVE LEARNING ?

Reading Time: 2 minutesWelcoming again on mind book, Learning means acquiring skills which have capacity to solve problems, makes our life simple.

जैसे बचपन में आपको साइकिल चलानी नहीं आती थी लेकिन साइकिल सीखने से पहले आपको ये खास तमन्ना थी की अगर साइकिल चलानी आ जाए तो आना जाना बहुत आसान हो जाएगा आपने साइकिल सीखी और अपनी लाइफ को इजी किया .

यह तो एक छोटा सा example है आपने अभी तक हजारों स्किल्स सीखी है। कुछ जाने & कुछ अनजाने में। इन्हीं Skills की वजह से आज आप खुद को या Specially अपने Brain को थैंक्स कहकर आज इस Process को थोड़ा Detail में जानने की कोशिश कर सकते हो।

Learning by definition –

Any relatively permanent changes in behaviour that occurs as a result of Practice or Experience.

Learning के काफी टाइप हैं लेकिन आज हम Cognitive Learning की चर्चा करेंगे जिसका हमारे सीखने में बहुत ज्यादा उपयोग है।

Cognition क्या है ? हमारा ब्रेन अपने Senses जैसे देखना, सुनना, महसूस करना आदि से जो भी इंफॉर्मेशन Collect करता है, उनकी प्रोसेसिंग करना यानी उनके मतलब को समझना ही Cognition है।

जैसे आपके सामने अगर सांप आ जाए तो Brain के द्वारा इस इंफॉर्मेशन को इस प्रकार से Process करना कि आप बचाव के लिए तैयार हो जाओ, Brain की यही पावर Cognition कहलाती है।

यह कंप्यूटर में प्रोसेसर के कार्य के लगभग समान मानी जा सकती है।

अब हम Learning & Cognition दोनों को मिला दे तो Cognitive Learning बनती है।

इसके अनुसार आप कुछ नई Skills सीखना चाहते हो तो आपको निम्न Steps से गुजरना पड़ेगा।

  1. अपने Environment से अपनी नई स्किल्स के बारे में सभी इंफॉर्मेशन को कलेक्ट करो।
  2. इन इंफॉर्मेशन के लिए ब्रेन को एक्सपोज करो यानी इनके बारे में ब्रेन को सोचने दो या कॉग्निटिव प्रोसेसिंग होने दो।
  3. Cognitive Processing में निम्न Steps रहेंगे।
    1. Selecting information.
    2. Association of information with each other.
    3. Elaboration of information in thoughts.
    4. Storage in memory.
    5. Retrieval when needed.
  1. Cognitive learning तब Complete मानी जाएगी जब आप (Step 3y ) इंफॉर्मेशन को इतनी गहराई से analysis करो कि वह आपकी प्रॉब्लम को Solve कर दे तब हम यह कह सकते है कि आप नई Skill Develop कर चुके होंगे।

अतः हमारा संदेश यही है कि

  • समस्याओं से घबराएं नहीं। अपने Brain पर विश्वास करें।
  • Frustration से दूर रहें, क्यों और कैसे जैसे सवालों के साथ Logically सोचे।
  • आपको ये सीखना चाहिए कि आपका Brain सीखता कैसे हैं।
  • Be Patience…. B/c Brain needs time.

Thank you!!

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