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ROLE OF PSYCHOLOGY FOR HUMAN MIND.

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Mindbook के name से आप सभी को एक बात तो समझ में आ गयी होगी कि हम यहाँ Mind यानि “मन” के बारे में बात करेंगे। लेकिन यह जानना भी काफी important है कि इन सभी के लिए हमारा source of information क्या है ?

हम इस वेबसाइट पे जितने भी issue कवर करेंगे उनमें से काफी में Psychology का योगदान रहेगा। अतः एक छोटा सा introduction तो बनता ही है ।

By Simplest Definition “Psychology” is “Study of human behavior & their mental process”.

हम इस संसार में जो कुछ भी करते है, चाहे वो व्यवहार हो या हमारा experience, उन सब की वजह brain से निकलकर आती है। Brain में कुछ process चलते है, भले ही वो thinking से related हो या memory से या ऒर कुछ लेकिन कहा जाता है कि brain में कोई molecule जिस अंदाज में twist करता है, उस इंसान का behaviour भी उसी के अनुरूप होता है।

Brain एक बहुत बड़ी term है ये उसी प्रकार से समझा जा सकता है जैसे कोई कंप्यूटर Hardware & Software, दोनों को मिलाकर Complete होता है। Brain के Hardware के पार्ट को सामान्यतया “Neurology” cover करती है।

& Software यानि हमारी feelings, mood state or emotions, thinking, perception, memory, judgement, motivation, decision making etc इन सबको किसी Computer के Operating System की software की तरह physical form में तो नहीं देखा जा सकता लेकिन हमारी जिंदगी के हर एक experience के पीछे इसी Operating System का योगदान है।

इस सिस्टम को Psychiatry & Psychology से समझा जा सकता है। दोनों name इसलिए लिखा है क्योंकि Psychiatry, Neurotransmitter के level पे work करती है। हर एक Experience का Molecular basis खोजने की कोशिश करती है।

जबकि Psychology, Behaviour पर ज्यादा focused रहती है, लेकिन जरूरत के अनुसार ये भी mental process से correlate करती रहती है।

तो कुल मिलाकर बात यही है कि आप जिसे Mind कहते हो, इनके बारे में लगभग “राज” Science की ये दो branch (Psychiatry & Psychology) हमारे सामने रखने में सक्षम है। अधिक जानकारी के लिए आप ये Video भी देख सकते हो।

So What is Psychology ?

  • Human Mind के experiences लिए Psychology एक broad range रखती है।
  • ये Cover करती है – Learning and Memory ; Sensation and perception ;
  • Motivation and emotion ; Thinking and language ;
  • Personality and social behavior ; Intelligence ;
  • Child development & ओर भी बहुत कुछ।

Psychology हमारे सोचने- समझने के pattern की study करती है, जिसका उपयोग हमारी विभिन प्रकार की problems को समझने & उन्हें solve करने में किया जाता है।

अतः Mind को समझने के लिए & इसी लाइफ को Great Life बनाने के लिए हमें बहुत कुछ जानना पड़ेगा, साइकोलॉजी उन्हीं में से एक है।

धन्यवाद।।

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IMPROVE OUR MEMORY BY USING THESE PSYCHOLOGY CONCEPTS.

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Memory हमारे जीवन मे बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हम जो कुछ भी नया सीखते है वो Memory में ही स्टोर रहता है। सीखने की योग्यता हमारे जीवन के लिए जरूरी  है।

कई बार हम इस उलझन में पड़ जाते है कि जिस जानकार व्यक्ति से आप बात कर रहे थे उसका नाम आपको याद नहीं आ रहा है या  आप चिंतित और  helpless अनुभव कर रहे है या परीक्षा से एक दिन पहले आपने जो कुछ अच्छी तरह से याद किया वह परीक्षा के दौरान याद नहीं आ रहा था। इसके अलावा हमे बेहद शर्मिंदगी महसूस करनी पड़ती है जब हम कई छोटी बड़ी बातों या वस्तुओ  को भूल जाते है।

अत: अच्छी memory आपको कई सफलता पाने मे मदद कर सकती है। इसी बात को ध्यान मे रखकर हम आपके लिए Memory सुधारने के कुछ Points लेकर आए है। तो देखते है की आप अपनी Memory को कैसे सुधार सकते है।

  1. ENGAGE IN DEEP LEVEL PROCESSING – अगर आप किसी सूचना को याद करना चाहते है तो उसे deep level process करे। अगर सूचना के कम attention से देखने की बजाय उसके meaning पर ज्यादा ध्यान देकर, उसे पहले से याद information से जोड़ा जाए & ये देखा जाना चाहिए कि ये हमारे कैसे काम आ सकती है। इससे brain नयी सूचना को encoding कर long term memory में स्टोर करने लग जाता है। जिससे उसकी memory भी अच्छी बन जाती है। जितना संभव हो ऐसे प्रश्न पूछे जाए जो उसके अर्थ ओर संबंध से जुड़े हो। इस तरह नयी सूचना आपकी already stored सूचना का हिस्सा बन स्थायी हो जाती है।
  2. METHOD OF LOCI (स्थान विधि) – इस METHOD को use करने के लिए याद किए जाने वाले items को पहले visual image की form मे एक जगह पर arrange कीजिये। Serial order मे items को याद रखने मे यह method उपयोगी है। इसके लिए पहले उन objects के स्थानो की कल्पना कीजिये जिनके specific sources को आप अच्छे से जानते हो, फिर जिन वस्तुओ को आप याद रखना चाहते है। उन्हे एक-एक स्थान से संबंधित कर दीजिये।
  3. THE KEYWORD METHOD – मान लीजिये की आपको English आती है ओर आप किसी अन्य किसी LANGUAGE को सीखना चाहते है तो English का कोई word जिसका sound उस विदेशी या दूसरी भाषा से मिलता जुलता हो, उसकी पहचान कर लीजिये। उदा॰ के लिए अगर आपको Spanish का word pato याद करना है जिसका मतलब है duck(ब्त्तख), तो आप English(अँग्रेजी) का pot शब्द ले सकते है। फिर main word pot ओर याद किए जाने वाला word(शब्द) pato, दोनों का एक interaction करते हुए कल्पना कीजिये की एक पानी के बर्तन (pot) मे एक duck (pato, Spanish word) है। Foreign language को सीखने का यह method रटने से अधिक अच्छा है। ओर इससे आप किसी word को लंबे समय तक याद रख सकते है।
  4. FIRST LETTER TECHNIQUE/ MNEMONIC TECHNIQUE – इस method को use करने के लिए याद किए जाने वाले हर शब्द के पहले अक्षर को लेकर उससे एक शब्द या sentence बनाए। उदहारण के लिए rainbow इन्द्रधनुष के रंगो को VIBGYOR की तरह याद किया जाता है जिसमे v=violet(बैंगनी), i=indigo(जामुनी), B=blue(नीला), g=green(हरा), y=yellow(पीला), o=orange(नारंगी), r=red(लाल)

इनमें आप LINKING और VISUALIZATION का प्रयोग कर इनकी memory span को बढ़ाया जा सकता है।  याद किए जाने वाले शब्द को उस WORD के साथ LINK कीजिये जो आपके दिमाग मे पहले से ही स्टोर है।

  1. CHUNKING – इस method मे कई छोटी छोटी units को मिलाकर एक बड़ा chunk (खंड) बनाया जाता है। उदहारण के लिए agar आपको number की एक series याद करनी है जैसे-198320072011 तो आप 1983, 2007, 2011 के chunk बना सकते है तथा इसे भारत के world cup जीतने के years की form मे याद कर सकते है। एक ओर उदहारण लीजिये जैसे-194719502004 तो आप 1947, 1950, 2004 का chunk बना सकते है। इस chunk को आप इस form मे याद कर सकते है 1947- मे भारत आजाद हुआ, 1950 मे भारत का संविधान लागू हुआ, 2004 मे सुनामी आई थी।
  2. ETYMOLOGY TECHNIQUE – यह technique शब्दो के अध्यन, उनकी उत्पत्ति और उनका विकास पर आधारित है। इसमे आप ROOT words के बारे मे सीखेंगे। English language के कई शब्द root words से बने है। ये root word ज़्यादातर लेटिन ओर ग्रीक भाषा से ही निकले है। जैसे- motivation word लेटिन word movere, जिसका मतलब “to move” है से निकला है। Motivation is what “moves” people to do the things they do। इसी प्रकार EGOCENTRIC-SELF CENTERED ROOT WORD EGO- I/SELF से बना है। इस technique से आप words को लंबे समय तक याद रख सकते है।

अंत मे आपकी अपनी memory को सुधारने के लिए आपको कई factors की ओर ध्यान देना होगा जो आपकी memory को प्रभावित करते है। जैसे, आपकी Physical & Mental Health, आपकी रुचि,  Content of new learning इत्यादि।

 

Thanks a lot.

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भूतों से ज्यादातर लोग रात को ही क्यों डरते है ? Perceptual Disturbance in night time.

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इंसानो की जिंदगी बहुत से उतार चढ़ाव से गुजरती है, कभी ख़ुशी तो कभी गम , इसी तरह कभी किसी को डराया जाता है तो कभी खुद को किसी से डरना पड़ता है।
अगर हम एक लिस्ट बनाये कि इंसान किस किस से डरता है तो उस लिस्ट में कहीं न कहीं भूतों का भी नंबर आ ही जाता है।
कोई भी इंसान भले वो बचपन में ही क्यों न डरा हो लेकिन डरा जरूर होगा।
लेकिन खास बात ये है कि भूत भी होस्टल के छात्रों की तरह रात को सैर सपाटा करते है, और मन करे तो किसी को भी डरा देते है।
तो आइए जानते है कि आखिर क्या वजह है कि लोग दिन में इनकी जरा भी परवाह नहीं करते लेकिन रात होते ही इनसे भय खाने लग जाते है ??

मुख्यतया ये खेल होता है हमारे : Thoughts+Perception का यानि हमारे आस पास के environment से हमारे senses के द्वारा हमारे ब्रेन को जो भी सिग्नल मिलता है उसे हमारा दिमाग किस रूप में लेता है, इससे ये (ब्रेन) क्या मतलब निकालता है।
हमारे frontal ब्रेन यानि आगे के हिस्से के ब्रेन को हम ज्यादातर सोचने के काम में लेते है। भूतों का खेल हमारी सोच से शुरू होता है।
भले ये सोच बाहर से आयी हो (किसी ने idea दिया हो) या कोई ऐसी घटना जो brain को समझ नहीं आयी & इसने इसे भूत मान के समझा।
बस यही से भूतों का शासन स्थापित हो गया।

यहाँ इंसान के पास thought पहुँच चुकी होती है लेकिन इसका use तब होता है जब हमारे Perception में थोड़ी सी भी abnormility हो चुकी होती है। भले वो Environment के कारणों से हुई हो।
जैसे 1.आप सुनसान रस्ते पर अंधेरे में जा रहे हो। आपका brain लगातार आपको आसपास के environment के बारे में सूचनाएं दे रहा होता है। तभी रस्ते में आगे एक छोटा सा पेड़ आने लगता है। आपका ब्रेन समझ नहीं पा रहा ये क्या है। तभी अचानक frontal cortex ने कहा, कही ये भूत तो नहीं, बस फिट हो गया, हवा की वजह से वो थोड़ा हिल भी रहा था। पसीनें आना शुरू हो गये, automatic thoughts आने लगी कि आज तक जिसके बारे में सुना था वो आज सामने आ गया।
अब यहाँ उसके पास 2 रस्ते है एक हिम्मत करे आगे जाये & देखे कि भूत दिखता कैसे है।
दूसरा धीरे से किनारा कर अपना रास्ता बदल लो।
ज्यादातर लोग 2nd चुनते है। जैसे तैसे जल्दी जल्दी घर पहुँचते है और फिर next day से प्रचार शुरू। क्योंकि जो मेमोरी हमारे emotions जैसे fear के साथ associate होती है वो बहुत strong होती है, उसे बंदा भूल नहीं पाता।

हा यही कहानी तब शुरू हो जाती है जब बंदा अँधेरे में रस्सी को सांप समझ लेता है।

तो इनकी वजह है Perception इस case में ब्रेन normal है लेकिन उसे पर्याप्त मात्रा में सिग्नल नहीं मिल रहे यानि Absence of Sensory Stimulation ; हमारे Sensory Organs जैसे कान, आँख पर्याप्त मात्रा में information नहीं दे पाते तो एक normal brain भी Abnormal Perception कर सकता है।
{जैसे किसी को बहुत दिनों तक अँधेरे कमरे में रख दो उसे Visual Hallucinations होने लग जाते है, ये क्या होते है आप ये वीडियो देख सकते हो )

& Normal brain से ये मतलब कि ऐसी बहुत सी बीमारियाँ होती है जिसमें Brain Normal नहीं होता ऐसे केस में मरीज को ऐसे लोग, जानवर या आकृति दिखने लग जाती है जो आसपास नहीं है।
ऐसी आवाजे आने लग जाती है जिनका दूर – दूर तक कोई स्त्रोत नहीं है।
अगर किसी को तेज बुखार हुआ हो तो भी ऐसा हो सकता है।
{आप ये सब न्यूरोलॉजी या साइकाइट्री वार्ड में जाकर मरीजो से बात कर इनके बारे में जान सकते हो}
इन्हें ही HALLUCINATION कहते है, याद रखना।।

लेकिन सोचने वाली बात है कि इस दुनिया में हजारों लाखो सालों से इंसान+जानवर पैदा हुए & मरे, उनका कर्मकांड किसी ने करवाया या नहीं करवाया कुछ पता नहीं,
अगर उनमें से 1% के भी भूत, अगर हमारे लिए समाज सेवा के कार्यो (जैसे कोई रिश्वत ले तो तुरंत उसके भूत चिपक जाये, कोई किसी पर जुल्म करे तो भूत उन्हें बचाने आये).
आदि करने लग जाते तो ये दुनिया बहुत रंगीन होती।।

खैर आपके लिए इतना कहना चाहेंगे कि भूतकाल में जो हो गया सिर्फ वही भूत है। ये जिंदगी हमारी खुद की है, इसे अच्छे से जीना आपकी अपनी जिम्मेदारी है। हर एक समस्या का समाधान है, आज नहीं तो कल।।

धन्यवाद।।
स्वस्थ रहो, मस्त रहो।।

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HOW WE LEARN WITH COGNITIVE LEARNING ?

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Welcoming again on mind book, Learning means acquiring skills which have capacity to solve problems, makes our life simple.

जैसे बचपन में आपको साइकिल चलानी नहीं आती थी लेकिन साइकिल सीखने से पहले आपको ये खास तमन्ना थी की अगर साइकिल चलानी आ जाए तो आना जाना बहुत आसान हो जाएगा आपने साइकिल सीखी और अपनी लाइफ को इजी किया .

यह तो एक छोटा सा example है आपने अभी तक हजारों स्किल्स सीखी है। कुछ जाने & कुछ अनजाने में। इन्हीं Skills की वजह से आज आप खुद को या Specially अपने Brain को थैंक्स कहकर आज इस Process को थोड़ा Detail में जानने की कोशिश कर सकते हो।

Learning by definition –

Any relatively permanent changes in behaviour that occurs as a result of Practice or Experience.

Learning के काफी टाइप हैं लेकिन आज हम Cognitive Learning की चर्चा करेंगे जिसका हमारे सीखने में बहुत ज्यादा उपयोग है।

Cognition क्या है ? हमारा ब्रेन अपने Senses जैसे देखना, सुनना, महसूस करना आदि से जो भी इंफॉर्मेशन Collect करता है, उनकी प्रोसेसिंग करना यानी उनके मतलब को समझना ही Cognition है।

जैसे आपके सामने अगर सांप आ जाए तो Brain के द्वारा इस इंफॉर्मेशन को इस प्रकार से Process करना कि आप बचाव के लिए तैयार हो जाओ, Brain की यही पावर Cognition कहलाती है।

यह कंप्यूटर में प्रोसेसर के कार्य के लगभग समान मानी जा सकती है।

अब हम Learning & Cognition दोनों को मिला दे तो Cognitive Learning बनती है।

इसके अनुसार आप कुछ नई Skills सीखना चाहते हो तो आपको निम्न Steps से गुजरना पड़ेगा।

  1. अपने Environment से अपनी नई स्किल्स के बारे में सभी इंफॉर्मेशन को कलेक्ट करो।
  2. इन इंफॉर्मेशन के लिए ब्रेन को एक्सपोज करो यानी इनके बारे में ब्रेन को सोचने दो या कॉग्निटिव प्रोसेसिंग होने दो।
  3. Cognitive Processing में निम्न Steps रहेंगे।
    1. Selecting information.
    2. Association of information with each other.
    3. Elaboration of information in thoughts.
    4. Storage in memory.
    5. Retrieval when needed.
  1. Cognitive learning तब Complete मानी जाएगी जब आप (Step 3y ) इंफॉर्मेशन को इतनी गहराई से analysis करो कि वह आपकी प्रॉब्लम को Solve कर दे तब हम यह कह सकते है कि आप नई Skill Develop कर चुके होंगे।

अतः हमारा संदेश यही है कि

  • समस्याओं से घबराएं नहीं। अपने Brain पर विश्वास करें।
  • Frustration से दूर रहें, क्यों और कैसे जैसे सवालों के साथ Logically सोचे।
  • आपको ये सीखना चाहिए कि आपका Brain सीखता कैसे हैं।
  • Be Patience…. B/c Brain needs time.

Thank you!!

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MYSTERIES OF THE HUMAN MIND.

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What is the mind? What is the experience of the self truly made of? How does the mind differ from the brain?
Though the mind’s contents—its emotions, thoughts, and memories—are often described, the essence of mind is rarely, if ever, defined.
 
“The Mind”…
What’s in your mind when you think about mind ? (As fb often ask this for publish a post.)
This is a tricky question. Needs high level of self awairness for understand the core existence about ourself.
Sometime we ask with ourself. Who am I ?
This is a question which ask by mind for knowing the fact about itself.
 
So exploration of this question needs some time…. Be patience … follow this website … You will definitely find answer.
 
Thanks.
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